बसंत–3

बसंत लेखक -दयाल चन्द्र सोनी वह कहां लुका पावन बसंत, वह कहां उमंग हुलास कहां वे कहां लताएं अलि मंडित वे पत्र पुष खग कहां किस महा शिशिर का यह प्रकोप क्‍यों भरता ठंडी आह पवन यों तुहिन दग्‍ध सुनसान म्‍लान क्‍यों उजड़ा यह नंदन कानन कब से छाया है यह विषाद क्‍या तुम्‍हें होश ...

बसंत – 2

बसंत लेखक -दयाल चन्द्र सोनी कोई कलि हो तो मुसकाए कोई अलि हो तो बलि जाये लो ऋतु बसंत की आयी कोई कोयल हो तो गाये कोई रूठा हो मन जाये कोई ठंडा हो गरमाए जीवन की लाली छायी कोई दिल हो तो खिल जाये। पतझड़ के क्‍लेश भुलाए फिर नव परिधान सजाये टेसू की ...

बसंत – 1

आओ बसंत लेखक -दयाल चन्द्र सोनी आओ बसंत, आओ बसंत हम कबसे तुम्‍हें बुलाते हैं ये गीत तुम्‍हारे गाते हैं क्‍यों आनाकानी करते हो मानो मुस्काओ तो बसंत आओ बसंत आओ बसंत। हम घोर शिशिर में कॉंप चुके हम पत्र पुराने झाड़ चुके नंगे भिखमंगे ठूंठ बने हम खड़े तुम्‍हारे दर बसंत आओ बसंत आओ ...